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मूल्ला नसरुद्दीन के कारनामें

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मूल्ला नसरुद्दीन के कारनामें  एक मुसलमान फकीर हुआ, नसरुद्दीन वह एक नदी पार कर रहा था नाव में बैठ कर रास्ते में दोनों की बातचीत हुई। नसरुद्दीन कुछ बड़ा जानी आदमी समझा जाता था। ज्ञानियों को हमेशा यह कोशिश रहती है कि किसी को अज्ञानी सिद्ध करने का मौका मिल जाए तो वह छोड़ नहीं सकते हैं। तो उसने, मल्लाह अकेला था, मल्लाह से पूछा कि भाषा जानते हो? उस मल्लाह ने कहा भाषा! बस जितना बोलता हूं उतना ही जानता हूं। पढ़ना लिखना मुझे कुछ पता नहीं है। नसरुद्दीन ने कहा तेरा चार आना जीवन बेकार हो गया; क्योंकि जो पढ़ना नहीं जानता उसकी जिंदगी में क्या उसे ज्ञान मिल सकता है? बिना पढ़े, पागल ! कहीं ज्ञान मिला है? लेकिन मल्लाह चुपचाप हंसने लगा। फिर आगे थोड़े चले और नसरुद्दीन ने पूछा कि तुझे गणित आता है? उस मल्लाह ने कहा नहीं, गणित मुझे बिलकुल नहीं आता है, ऐसे ही दो और दो चार जोड़ लेता हूं यह बात दूसरी है। नसरुद्दीन ने कहा : तेरा चार आना जीवन और बेकार चला गया; क्योंकि जिसे गणित ही नहीं आता, जिसे जोड़ ही नहीं आता है वह जिंदगी में क्या जोड़ सकेगा, क्या जोड़ पाएगा। अरे, जोड़ना तो जानना चाहिए, तो कुछ...