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मूर्ख कछुआ

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मूर्ख कछुआ बहुत समय पहले की बात है। एक पा जो किसी गांव में एक नदी में रहता था। उस की उन बगुलो से दोस्ती थी। दोनों दोस्त एक साथ खूब मजा किया करते थे। एक बार उनके यह  बारिश नहीं हुई, जिस कारण वहां  नदी सुख गई। पशु पक्षी प्यास से मरने लगे। बगुले अपनी जान बचाने के लिये नदी छोड़ दूसरे स्थानों पर जाने लगे। बगूलों ने भी अन्य पक्षियों के साथ दूसरे जगह जाने का फैसला लिया जाने से पूर्व वह अपने मित्र कछुए से मिलने गये। उनके जाने की बात सुनकर कछुए ने उनसे उसे भी अपने साथ में ले जाने के लिए कहा इस पर बगुलों ने कहा कि यह भी उसे वहाँ छोड़ कर नहीं जाना चाहते  परन्तु   ले जा नहीं सकता और वह उड़कर कहीं भी जा सकते है। उनकी बात सुनकर बोला कि यह सच है कि वह नहीं सकता। परन्तु उसने पास इस समस्या का हल है। एकीकरों ने उतरी।। बोला तुम एक मजबूत डंडी लाओ। उस डंडी  के दोनों कोनों को तुम अपनी-अपनी चोंच मे पकड़ लेना और मैं उसी को बीच में से पकड़कर लटक जाऊंगा। इस प्रकार मैं भी तुम्हारे साथ जाऊगा और हम अपनी जान बचा सकेंगे।" बगुलों को कछुए की बात पसंद आ गई और वह वहां से चलने की ...

लालची कबूतर

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लालची कबूतर लालची कबूतर एक बार की बात किसी जंगल में एक बढा सा पेड़ था। उस पेड़ पर प्रतिदिन बहुत से पक्षी आकर विश्राम करते थे। एक दिन एक बहेलिये ने पक्षी पकड़ने की इच्छा से वहाँ चावल के दाने फैला दिये और उसके ऊपर जाल बिछा दिया और स्वयं एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया । कुछ समय बाद उस पेड़ पर एक कबूतरों का झुण्ड आकर विश्राम करने लगा । तभी उनकी नजर चावलों के दानो पर पड़ी । दाने देखकर उनकी भूख जाग उठी और वह दाने चुगने के लिए जाने लगे। तब उनके मुखिया ने उन्हे समझाया की उसे इन दानों के पीछे कुछ गड़बड़ लग रही है, इसलिए उन्हें यह दानें नहीं चुगने चाहिए। पर कबूतरों ने अपने मुखियाकी बात नहीं सुनीं और दाने चुगने के लिए चले गए। सारे कबूतर जाल में फँस गए। उन्हे अपने मुखिया की बात न मानने तथा लालच करने की सजा मिल गई। उनके मुखिया ने उन्हे एक दिशा में उड़ने के लिए कहा। सब कबूतर जाल के साथ एक ही दिशा में उड़े और बेहलिया देखता ही रह गया । सब कबूतर अपने मुखिया के दोस्त चूहे के घर जा पहुँचे । चूहे ने अपने पैने दांतो से जाल काट कर कबूतरों को मुक्त कर दिया। कबूतरों ने अपने प्राण बचाने वाले नन्हे च...

मुस्तफा

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मुस्तफा  300 साल पहले की बात है, मुस्तफा नाम का एक गुलाम, अपने क्रूर राजा से परेशान होके जंगल में भाग जाता है। वहां अचानक से एक लंगड़ाता हुआ शेर दिखाई देता है। वह चुपके से पेड़ के पीछे से शेर की सारी हरकतों को देख रहा होता है। उसको समझ में आता है की शेर के पाव में कुछ अटका पड़ा है जिसको बार बार शेर हटाने की कोशिश कर रहा, लेकिन उसमे असफल रहता है। किसी तरह हिम्मत जुटा के मुस्तफा शेर के पास जाता है और धीरे से उसको पुचकारना चालू करता है। शेर पहले तो गुर्राता है लेकिन फिर शांत हो जाता है। धीरे से मौका पाके मुस्तफा शेर के पैर से काटा निकाल देता है और फिर जंगल में निकल पड़ता है। कुछ दिनों बाद वही क्रूर राजा जंगल में शिकार करने आता है और वह कई जानवरो को पकड़ लेता है जिसमे की वह शेर भी शामिल होता है। इसी बिच मुस्तफा भी राजा के सैनिको द्वारा पकड़ लिया जाता है और उसको राजा के सामने पेश किया जाता है । मुस्तफा को देखे ही राजा का खून खौल उठता है और वह अपने सैनिको से मुस्तफा को शेर के पिंजरे में डालने को कहता है ताकि शेर उसको देखते ही उसको मार डाले। पिंजरे में डाले जाने पे मुस्तफा की ...