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शेर और गाय

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शेर और गाय एक गाँव में बहुत सारी गायें थे और वो चारा के लिए पास के लिए बगल वाले जंगल में जाते थे। उसी जंगल में एक बहुत खूंखार शेर रहता था। जब भी गाये जंगल में जाती थी, शेर एक गाय को चुन कर उसको मार देता था और उसका मांस खा जाता था। इस बात को लेके गायों ने एक बैठक बुलाई और उसमे समझदार गाय ने कहा " आप लोग सब जानते है की शेर हम में से हर बार एक को मार के खा जाता है और उसका कारण यह की हम सब अलग अलग जंगल में चरने के लिए जाते है। आज से हम सब लोग एक साथ चलेंगे और चरेंगे। "सभी गायें जंगल में निकल पड़ी और जैसे ही जंगल में शेर दिखा, सभी गायें झुण्ड में तरफ धावा बोल दिया। शेर यह देख के डर गया और वहां से भाग गया। MORAL: विभाजित हम गिर जाते हैं। संयुक्त हम खड़े। एकता में शक्ति है।

मुर्गी और बाज़

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मुर्गी और बाज एक बाज़ और एक मुर्गी आपस में बात कर रहे थे। बाज़ ने मुर्गी से कहा, "तुम एक अहसान फरामोश पक्षी हो ।" "तुमने ऐसा क्यों कहा ?" मुर्गी ने गुस्से से पूछा। बाज़ ने जवाब दिया, "तुम्हारा मालिक तुम्हें खिलाता है, अगर वे तुम्हें पकड़ने आते हैं, तुम एक कोने से दूसरे कोने में उड़ने लगते हो। तुम एक कृतघ्न हो। मैं एक जंगली पक्षी हूं, फिर भी मैं हमेशा उन लोगों को खुश करता हूं जो मुझ पर दया करते हैं। मुर्गी ने चुपचाप पूछा, "मैंने सैकड़ों मुर्गियों को भूनते देखा है। अगर आप मेरी जगह होते, तो आप अपने स्वामी के पास कभी नहीं जाते। जबकि मैं केवल कोने से कोने तक उड़ती हूं, आप पहाड़ी से पहाड़ी तक उड़ते हैं।" शिक्षा : बिना पूरी बात जाने, किसी निर्णय पर नहीं पहुंचना चाहिए।

अजीब शर्त गड़ेरिये की

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अजीब शर्त गड़ेरिये की एक राजा था, उसने अपने मंत्रियों से सवाल पूछा कि ऐसा कौन सा कुआं है, जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता ? इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे पाया. आखिर में राजा ने अपने राज पंडित से कहा कि इस प्रश्न का उत्तर 7 दिनों में बताओ, नहीं तो तुम्हें नगर से बाहर निकाल दिया जायेगा । राज पंडित उस सवाल का जवाब ढूंढने निकला । 6 दिन बीतने के बाद भी राज पंडित को जवाब नहीं मिला। निराश होकर जब वो जंगल से गुजर रहा था, तभी उसकी मुलाकात एक गड़ेरिए से हुई. गड़ेरिए ने राज पंडित की उदासी का कारण पूछा । राज पंडित ने सारी बात बता दी। गड़ेरिए ने कहाः मेरे पास पारस पत्थर है, उससे आप कितना भी सोना बना सकते हैं। फिर आपको राजा के पास जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, लेकिन इसके पहले आपको मेरा चेला बनना पड़ेगा । पहले तो राज पंडित ने सोचा कि मैं इस मामूली गड़ेरिए का चेला क्यों बनूं. लेकिन बाद में पारस पत्थर के लालच में राज पंडित ने गड़ेरिए का चेला बनना स्वीकार कर लिया। इसके बाद गड़ेरिया बोला- पहले भेड़ का दूध पीओ फिर चेले बनो।  राजपंडित ने कहा कि यदि ब्राह्मण भेड़ का दूध पीयेगा ...

दो दोस्त और भालू

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दो दोस्त और भालू एक दिन दो युवा दोस्त राम और श्याम ने जंगल जाने का फैसला किया, और किसी भी खतरे के खिलाफ एक-दूसरे की मदद करने का वादा भी किया। अचानक जंगल के रास्ते में एक भालू ने उन पर हमला कर दिया। राम जल्दी से दौड़ा और एक पेड़ पर चढ़ गया, दूसरी ओर श्याम के पास पर्याप्त समय नहीं था। बचने के लिए वह जमीन पर लेट गया, जैसे वह मर गया हो । भालू तेजी से आगे बढ़ा और श्याम के पास आया, और ऐसा लगा जैसे भालू राम के कान में फुसफुसा रहा हो। श्याम ने अपनी सांस रोककर रखा और कुछ देर बाद भालू चला गया। राम पेड़ से नीचे आया और पूछा श्याम भालू ने आपके कान में क्या फुसफुसाया श्याम ने जवाब दिया भालू ने मुझे स्वार्थी दोस्तों से दूर रहने के लिए कहा जो खतरे के समय भाग जाते हैं। नैतिक शिक्षा : हमें भगवान की योजना में विश्वास रखना चाहिए।

चतुर किसान

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चतुर किसान एक बार एक किसान के पास एक बकरी, घास का एक गट्ठर और एक शेर था। उसे एक छोटी नाव पर एक नदी पार करनी थी। जो एक बार में उनमें से केवल दो को ही ले जा सकता था। किसान मुश्किल में था कि अगर वह पहले शेर को ले जाए तो उसकी अनुपस्थिति में बकरी घास खा जाएगी। यदि वह घास ले ले तो शेर बकरी को खा जाएगा। अंत में, उसने सही समाधान ढूंढ लिया । उसने पहले बकरी को गया और नदी के दूसरी तरफ छोड़ दिया। फिर उसने शेर को अपने दूसरे चक्कर में ले गया। वह शेर को छोड़कर बकरी को वापस ले आया । बकरी को इस ओर छोड़कर, वह घास की गट्ठर के साथ ले गया। वह शेर के पास घास छोड़ कर बकरी को लेने के लिए अंत में लौट आया। इस प्रकार वह बिना किसी नुकसान के नदी पार कट गया। नैतिक शिक्षा : छोटी सी सूझबूझ भी आगे बहुत काम आती है।

दिल का छू लेने वाली कहानी

दिल का छू लेने वाली कहानी एक बार एक लडके को अपनी क्लास की एक लडकी से प्यार हो गया ओर लडकी को भी लडके संग प्यार हो गया, लडका लडकी से कहता था कि मैं बगैर दिल के जी रहा हूँ क्योंकि मेरा दिल तुम्हारे पास हैं      कुछ दिनों के बाद लडके का इरादा बदल जाता हैं और वह लडकी से कहता हैं कि अब हम साथ में नहीं रह सकते क्योंकि मेरे घरवालों ने मेरे लिये दूसरी लड़की को पसन्द किया हैं और मैं उनकी पसन्द को ही अपनी पसन्द मानता हूँ इसलिये अब हम अलग हो जाते हैं,  लड़की ने लड़के की बात मन जाति है और दोनो अलग हो जाते है और कुछ दिनों के बाद लडके की शादी हो जाती हैं, लड़की ने भी लडके को शादी का गिफ्ट भेजा, लडके ने जैसे ही गिफ्ट को खोला तो वह दंग गया। और लडका  फूट-फूट कर रोने लगा । क्योंकि उस गिफ्ट में खून से लथपथ उस लडकी का दिल था और उसके साथ एक पत्र था और उसमें उसमें लिखा था कि पागल तुम अपना दिल तो मेरे पास ही छोड़ गये हो उसे तो वापस ले लो वरना अपनी पत्नी को क्या दोगें । 

जीवन का संघर्ष

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जीवन का संघर्ष एक व्यक्ति को तितली का एक कोकून मिला, जिसमें से तितली बाहर आने के लिए प्रयत्न कर रही थी । तितली के प्रयासों से कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया था, जिसमें से बाहर निकलने को तितली आतुर तो थी लेकिन वह छेद बहुत छोटा था और तितली का उस छेद में से बाहर निकलने का संघर्ष जारी था। उस व्यक्ति से यह देखा नहीं गया और वह जल्दी से कैंची ले आया और उसने कोकून को एक तरफ से काट कर छेद बड़ा कर दिया । तितली आसानी से बाहर तो आ गई लेकिन वह अभी पूरी तरह विकसित नहीं थी । उसका शरीर मोटा और भद्दा था तथा पंखों में जान नहीं थी। दरअसल प्रकृति उसे कोकून के भीतर से निकलने के लिए संघर्ष करने की प्रक्रिया के दौरान उसके पंखों को मजबूती देने, उसकी शारीरिक शक्ति को बढ़ाने व उसके शरीर को सही आकार देने का कार्य भी करती है। जिससे जब तितली स्वयं संघर्ष कर, अपना समय लेकर कोकून से बाहर आती है तो वह आसानी से उड़ सकती है। प्रकृति की राह में मनुष्य रोड़ा बन कर आ गया था, भले ही उसकी नीयत तितली की सहायता करने की रही हो। नतीजन तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और जल्द ही काल कवलित हो गई। सीख: संघर्ष के बाद ही कोई भी...

किसी को हल्के में न ले

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किसी को हल्के में न ले मुनि श्री 108 प्रमाणसागर जी के प्रवचनांश एक दिन एक व्यक्ति के पैर के अँगूठे में चोट लग गई ओर वह चिकित्सक के पास पहुँचा। जब डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने जांच की और कहा- भैया अँगूठा काटना पड़ेगा क्योंकि जहर फैल गया है। मरीज ने कहा-डॉक्टर साहब अँगूठा यदि कट जायेगा तो अच्छा नहीं रहेगा, आप तो दवाई दे दो और कैसे भी हो ठीक कर दो। डॉक्टर ने कहा ठीक है कोशिश करते हैं। फिर मरीज आठ दिन बाद चिकित्सक के पास गया और कहा अब तो पूरे पंजे में दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने जांच की और कहा भैया अब तो पूरे पंजे में जहर फैल गया है, पूरा पंजा काटना पड़ेगा। मरीज ने कहा आप तो ऐसा करो डॉक्टर साहब अँगूठा काट दो, पंजा रहने दो। मरीज पन्द्रह दिन बाद वापस डॉक्टर के पास गया तो घुटने तक दर्द हो गया था। डॉक्टर ने जांच की ओर कहा भैया अब तो आधा पैर काटना पड़ेगा। मरीज ने कहा कि आप तो पंजा काट दो। कुछ दिन बाद पता लगा कि जीवन से ही हाथ धोना पड़ गया। सारे शरीर में जहर फैल गया और सब नष्ट हो गया। एक छोटे से घाव पर ध्यान न देने से वह बढ़कर जान लेवा बन सकता है। इसी प्रकार मन की कषाय (क्रोध, मान, मा...

शिष्य की पात्रता

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शिष्य की पात्रता  मुनि श्री 108 प्रमाणसागर जी के प्रवचनांश एक बार राजा जनक के आमंत्रण पर संत व्यास जी उन्हें कथा सुनाने के लिये आए। कथा बड़ी होने से कई दिनों से चल रही थी। एक दिन शासकीय कार्यों के कारण राजा को आने में थोड़ी देर हो गई। व्यास जी जनक की प्रतीक्षा करते रहे। इस वजह से अन्य शिष्यों को बहुत बुरा लगा और वे व्यास जी से विनयपूर्वक शिकायत करते हुए बोले, "आप जैसे संत पुरुषों के द्वारा राजा-महाराजाओं की प्रतीक्षा करना अच्छा नहीं लगता। अध्यात्म के दरबार में सब समान होते है! क्या हम लोगों में कोई पात्रता नहीं है?" उस समय व्यास जी ने कोई जबाव नहीं दिया फिर जब राजा जनक आए तब कथा प्रारम्भ हुई और इसके साथ ही उन्होंने अपनी माया से महल में आग लगा दी। राजमहल में आग की भनक लगते ही, वहाँ जितने लोग थे सब सभा छोड़कर भागने लगे सबने सोचा कहीं आग हमारी कुटिया तक न फैल जाए। सभा में केवल दो व्यक्ति बचे थे व्यास जी व राजा जनक । व्यास जी ने अपनी माया समेटी और आग बुझ गयी। जब सब लोग सभा में वापस आए तो व्यास जी ने कहा- तुम लोग केवल आशंका में भागे कि मेरी कुटिया में आग न लग जाए, , ले...

दो घड़े

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 दो घड़े एक बार एक नदी में ओरों को बाद आई। तीन दिनों के बाद बाद का जोर कुछ कम हुआ। बाढ़ के पानी में ढेरो चीजें बह रही थी उनमें एक तौबे का पड़ा एवं एक मिट्टी का पड़ा भी था ये दोनों पड़े अगल-बगल तैर रहे थे ताँबे के बड़े ने मिट्टी के घड़े से कहा, "अरे भाई, तुम तो नरम मिट्टी के बने हुए हो और बहुत नाजुक हो अगर तुम चाहो तो मेरे समीप आ जाओ मेरे पास रहने से तुम सुरक्षित रहोगे।" 'मेरा इतना ख्याल रखने के लिए आपको धन्यवाद, "मिट्टी का पड़ा बोला, " पर मैं आपके करीब आने की हिम्मत नहीं कर सकता। आप बहुत मजबूत और बलिष्ठ है मैं ठहरा कमजोर और नाजुक कहीं हम आपस में टकरा गए, तो मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। यदि आप सचमुच मेरे हितैषी है, तो कृपया मुझसे थोड़ा दूर ही रहिए।" इतना कहकर मिट्टी का पड़ा तैरता हुआ ताँबे के पड़े से दूर चला गया।  सीख:- ताकतवर पड़ोसी से दूर रहने में ही भलाई है।

साहस की ताकत

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साहस की ताकत एक दिन सेवक उन फूलदानों की सफाई कर रहा था, सफाई करने के दौरान उसका हाथ एक फूलदान से लग गया और वह गिरकर टूट गया । राजा को जब इस बात का पता चला तो उसने उस सेवक को फांसी पर लटकाने का आदेश दे दिया। उनके राज्य में एक बूढ़ा व्यक्ति हुआ करता था । जब उसको यह बात पता चली वह फौरन राजा के पास गया और उस फूलदान को जोड़ने की बात कही और वह फूलदान रखे हुए स्थान पर पहुंचा। जैसे ही बूढ़े व्यक्ति ने देखा कि सारे फूलदान उसकी नजरों के सामने हैं, उसने फौरन उन सभी को लाठी से एक-एक करके तोड़ना शुरू कर दिया और देखते ही देखते सारे फूलदान टूटकर बिखर गए। राजा इस बात से बहुत क्रोधित हुआ और बोला, 'अरे मूर्ख ! तुमने यह क्या कर दिया? इसकी सजा जानते हुए तुमने सारे फूलदान तोड़ डाले, तुम्हें भी मृत्युदंड दिया जाएगा!' इस पर बूढ़े व्यक्ति ने दृढ़ता से जवाब दिया, 'महाराज ! एक फूलदानी के पीछे आप किसी को मृत्युदंड दे देते हैं. यदि हर फूलदानी के बदले आप हर व्यक्ति को मृत्युदंड देंगे तो भविष्य में 29 लोगों की जान जाने की संभावना थी क्योंकि हर फूलदान के पीछे एक व्यक्ति की जान जा सकती थी । इसल...

बाज़ की सीख

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बाज़ की सीख एक बार एक शिकारी जंगल में शिकार करने के लिए गया । बहुत प्रयास करने के बाद उसने जाल में एक बाज पकड़ लिया। शिकारी जब बाज को लेकर जाने लगा तब रास्ते में बाज ने शिकारी से कहा, तुम मुझे लेकर क्यों जा रहे हो ? शिकारी बोला, मैं तुम्हें मारकर खाने के लिए ले जा रहा हूँ। बाज ने सोचा कि अब तो मेरी मृत्यु निश्चित है। वह कुछ देर शांत रहा और कुछ सोचकर बोला, देखो, मुझे जितना जीना था मैंने जी लिया। अब मेरा मरना निश्चित है, लेकिन मरने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा है। बताओ अपनी इच्छा ? बाज ने बताना शुरू किया-मरने से पहले मैं तुम्हें दो सीख देना चाहता हूँ, इसे तुम ध्यान से सुनना और सदा याद रखना। पहली सीख तो यह कि किसी कि बातों का बिना प्रमाण, बिना सोचे- समझे विश्वास मत करना और दूसरी ये कि यदि तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो या तुम्हारे हाथ से कुछ छूट जाए तो उसके लिए कभी दुःखी मत होना। शिकारी ने बाज की बात सुनी और अपने रास्ते आगे बढ़ने लगा। कुछ समय बाद बाज ने शिकारी से कहा-शिकारी एक बात बताओ अगर मैं तुम्हें कुछ ऐसा दे दूं जिससे तुम रातों-रात अमीर बन जाओ तो क्या तुम मुझे आजाद कर दोगे? शिकार...

दो माली

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दो माली एक गांव में दो पड़ोसी थे। दोनों माली थे। दोनों के पास अपने-अपने बागान थे और वे उनमें तरह-तरह के फलों के पौधे उगाते थे । यही बागान उनकी जीविका के साधन थे। उनमें से एक पड़ोसी बहुत सख्त था और अपने पौधों की जरूरत से ज्यादा देखभाल करता था । उसे लगता था कि पौधों की अगर ठीक से देखभाल नहीं की गयी तो वे नष्ट हो सकते हैं, लेकिन दूसरा पड़ोसी पौधों को प्राकृतिक रूप से विकसित होने देने पर विश्वास करता था। वह पौधों की उतनी ही देखभाल करता था, जितने कि उन्हें आवश्यकता थी, लेकिन वह अपने पौधे के तनों और टहनियों को काट-छांट न करके अपनी मनमर्जी दिशा में बढ़ने देता था। इससे वे स्वाभाविक रूप से विकसित होते थे । एक शाम, बहुत भीषण तूफान आया, जिसमें भारी बारिश हुई। तूफान ने कई पौधों को नष्ट कर दिया। अगली सुबह, जब सख्त पड़ोसी उठा, तो उसने पाया कि उसके सारे पौधे उखड़ गये और बर्बाद हो गये। वहीं, जब दूसरा पड़ोसी उठा, तो उसने पाया कि उसके पौधे अभी भी मिट्टी में मजबूती से लगे हुए हैं, इतने तूफान के बावजूद रिलैक्स पड़ोसी के पौधे खुद ही चीजों का प्रबंधन करना सीख गये थे। इसलिए, इसने अपना काम किया, ग...

मुर्गा की अकल ठिकाने

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मुर्गा की अकल ठिकाने  एक समय की बात है, एक गांव में ढेर सारे मुर्गे रहते थे। गांव के बच्चे ने किसी एक मुर्गे को तंग कर दिया था। मुर्गा परेशान हो गया, उसने सोचा अगले दिन सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। सब सोते रहेंगे तब मेरी अहमियत सबको समझ में आएगी, और मुझे तंग नहीं करेंगे। मुर्गा अगली सुबह कुछ नहीं बोला। सभी लोग समय पर उठ कर अपने-अपने काम में लग गए इस पर मुर्गे को समझ में आ गया कि किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता   नैतिक शिक्षा:- घमंड नहीं करना चाहिए आपकी अहमियत लोगो को बिना बताये पता  चलती है।

शेर का आसन

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शेर का आसन   शेर जंगल का राजा होता है। वह अपने जंगल में सब को डरा कर रहता है। शेर भयंकर और बलशाली होता है। एक दिन शहर का राजा जंगल में घूमने गया । शेर ने देखा राजा हाथी पर आसन लगा कर बैठा है। शेर के मन में भी हाथी पर आसन लगाकर बैठने का उपाय सुझा। शेर ने जंगल के सभी जानवरों को बताया और आदेश दिया कि हाथी पर एक आसन लगाया जाए। बस क्या था झट से आसन लग गया। शेर उछलकर हाथी पर लगे आसन मैं जा बैठा। हाथी जैसे ही आगे की ओर चलता है, आसन हिल जाता है और शेर नीचे धड़ाम से गिर जाता है। शेर की टांग टूट गई शेर खड़ा होकर कहने लगा-' पैदल चलना ही ठीक रहता है। ' नैतिक शिक्षा - जिसका काम उसी को साजे, शेर ने आदमी की नक़ल करनी चाही और परिणाम गलत साबित हुआ।

चालाक बन्दर

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चालाक बन्दर किसी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा  आम का पेड़ था । उस पर एक बन्दर रहता था । उस पेड़ पर बड़े मीठे फल लगते थे । बन्दर उन्हे भरपेट खाता और मौज उड़ाता । वह अकेले ही मजे में दिन गुजार रहा था । एक दिन एक मगरमच्छ उस नदी में से पेड़ के नीचे आया । बन्दर के पूछने पर मगरमच्छ ने बताया की वह वहाँ खाने की तलाश में आया है। इस पर बन्दर ने पेड़ से तोड़कर बहुत से मीठे फल मगर को खाने के लिए दिए। इस तरह बन्दर और मगरमच्छ में दोस्ती हो गई । अब मगरमच्छ हर रोज़ वहाँ आता और दोनों मिलकर खूब फल खाते । बन्दर भी एक दोस्त पाकर बहुत खुश था । एक दिन बात-बात में मगरमच्छ ने बन्दर को बताया की उसकी एक पत्नी है जो नदी के उस पार उनके घर में रहती है। तब बन्दर ने उस दिन बहुत से मीठे फल मगरमच्छ को उसकी पत्नी के लिए साथ ले जाने के लिए दिए । इस तरह मगरमच्छ रोज़ जी भरकर फल खाता और अपनी पत्नी के लिए भी लेकर जाता । मगरमच्छ की पत्नी को फल खाना तो अच्छा लगता पर पति का देर से घर लौटना पसन्द नहीं था । एक दिन मगरमच्छ की पत्नी ने मगरमच्छ से कहा कि अगर वह बन्दर रोज-रोज इतने मीठे फल खाता है तो उसका कलेजा कितना मी...

छोटी चीज में बड़ी बात

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छोटी चीज में बड़ी बात एक बालक ने  माँ को कुछ लिखते देखा, तो बोला, 'माँ, आप पेन्सिल से क्यों लिख रही है?' माँ बोली, 'बेटा, मुझे पेन्सिल से लिखना अच्छा लगता है। इसमें कई गुण है।' बालक चौंका और बोला, 'दिखने में तो यह और पेन्सिलों जैसी ही है। लिखने के आलावा इसमें और कौनसा गुण है?' माँ बोली, 'यह जीवन से जुडी कई अहम सीखे हमें सिखाती है। इसके पांच गुण तुम अपना लो, तो इस संसार में शांतिपूर्वक रह सकोगे।  पहला गुण - तुम्हारे भीतर बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल करने की योग्यता है। लेकिन तुम्हे सही दिशा में निर्देशन चाहिए। यह दिशा निर्देशन वह ईश्वर देगा और हमेशा अच्छी राह पर चलाएगा। दूसरा गुण - लिखते- लिखते बीच में रुकना पड़ता है। पेन्सिल की नोंक को पैना करना पड़ता है। इससे  इसे थोड़ा कष्ट होता है लेकिन यह अच्छा लिख पाती है। इसलिए अपने दुःख, हार को धैर्य से सहन करों ।  तीसरा गुण – पेन्सिल गलतिया - सुधारने के लिए रबड़ के प्रयोग की इजाजत देती है। इसलिए कोई गलती हो तो उसे सुधार लो। चौथा गुण – पेन्सिल में महत्व बाहरी लकड़ी का नहीं, अंदर के ग्रेफाइट का है इसलिए अपने ब...

सच्ची सुंदरता

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सच्ची सुंदरता राजकुमार भद्रबाहु को अपने सौंदर्य पर बहुत गर्व था। वह खुद को दुनिया का सबसे सुंदर आदमी मानता था। एक बार वह अपने मित्र सुकेशी के साथ कहीं घूमने जा रहा था। रास्ते में श्मशान आ गया। वहां जब भद्रबाहु ने आग की लपटें देखीं तो चौंक गया। उसने सुकेशी से पूछा, 'यहां क्या हो रहा है?" सुकेशी ने कहा, 'युवराज, मृत व्यक्ति को जलाया जा रहा है।' इस पर भद्रबाहु ने कहा, 'जरूर वह बहुत ही कुरूप रहा होगा । सुकेशी बोला, 'नहीं, वह बहुत ही सुंदर था । इस पर भद्रबाहु ने आश्चर्य से कहा, 'तो फिर उसे जलाया क्यों जा रहा है ?' सुकेशी ने जवाब दिया, 'मृत व्यक्ति की देह को एक दिन जलना ही होता है। चाहे वह कितना ही सुंदर क्यों गया। न हो। मरने के बाद शरीर नष्ट भद्रबाहु को काफी धक्का लगा। उसका सारा अहंकार चूर-चूर हो गया। उसके बाद से वह हरदम उदास रहने लगा। इससे उसके परिवार के लोग और मित्र चिंतित हो गए। एक दिन भद्रबाहु को एक महात्मा के पास ले जाया गया। सारी स्थिति जानकर महात्मा ने उसे समझाया, 'कुमार, तुम भारी भूल कर रहे हो । शरीर थोड़े सुंदर होता है। सुंदर तो ह...

हाथी और अंधे व्यक्ति

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हाथी और अंधे व्यक्ति एक गांव में 6 अंधे व्यक्ति बड़ी खुशी के साथ आपस में रहते थे। एक बार उनके गांव में एक हाथी आया ।जब उनको इस बात की जानकारी मिली, तो वो भी उस हाथी को देखने गए । लेकिन अंधे होने के कारण उन्होंने सोचा, हम भले ही उस हाथी को न देख पाएं लेकिन छूकर जरूर महसूस करेंगे कि हाथी कैसा होता है. वहां पहुंच कर उन सभी ने हाथी को छूना शुरू किया । हाथी को छूकर एक अंधा व्यक्ति बोला, हाथी एक खंभे की माफिक होता है, मैं अब अच्छे से समझ गया हूं, क्योंकि उसने हाथी के पैरों को महसूस किया था ।तभी दूसरा व्यक्ति हाथी की पूंछ पकड़ कर बोला, “अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है,” तभी तीसरा व्यक्ति भी बोल पड़ा, “अरे नहीं, मैं बताता हूं, यह तो पेड़ के तने की तरह होता है.” “तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी तो एक बड़े सूपे की तरह होता है!” चौथे व्यक्ति ने कान को छूते हुए सभी को समझाया. तभी अचानक पांचवें व्यक्ति ने हाथी के पेट पर हाथ रखते हुए सभी को बताया, “अरे नहीं-नहीं, यह तो एक दीवार की तरह होता है। “ऐसा नहीं है, हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है", छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी ।सभ...

हिम्मत

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हिम्मत राजकुमार में तलवार चलाने का साहस नहीं था, फिर भी पिता ने किसी तरह राजकुमार को थोड़ी बहुत तलवार चलानी सिखा दी । राजा ने राजकुमार को युद्ध में ले जाने की भी कोशिश कई बार की, लेकिन राजकुमार डर की वजह से युद्ध में नहीं जाता था । राजा अपने पुत्र का डर दूर करने की कोशिश करते रहते थे, लेकिन राजकुमार की हालत वैसी थी ।एक दिन उनके राज्य पर दुश्मनों ने आक्रमण कर दिया ।राजा की सेना के मुकाबले दुश्मनों की सेना बहुत बड़ी थी। कुछ ही समय में राजा के सभी महारथी योद्धा युद्ध में मारे गए। अंत में राजा ही जीवित बचे थे। जब राजकुमार को मालूम हुआ कि युद्ध में सब कुछ खत्म हो गया है तो वह भी हिम्मत करके महल से बाहर निकला, बाहर निकलते ही उसने देखा कि सामने से दुश्मनों की सेना आगे बढ़ रही है । वह डर गया । अपने महल की ओर भागने के लिए पीछे पलटा तो उसने देखा कि पीछे भी दुश्मनों की सेना ने उसके पिता को बंदी बना लिया है । राजा को बंदी बना देखकर महल के अंदर के सेवकों ने महल का दरवाजा बंद कर दिया, ताकि दुश्मन महल के अंदर न आ सकें। मैदान में राजकुमार अकेला और सामने दुश्मनों की सेना थी ।उसके पास दो विक...