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दिल छू लेने वाली कहानी

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दिल छू लेने वाली कहानी  रोम में एक बहुत प्रसिद्ध लोहार हुआ। उसकी प्रसिद्धि सारी दुनिया में थी, क्योंकि वो जो भी बनाता था, वो चीज़ बेजोड़ होती थी। उस लोहार, की दुकान पर बनी तलवार का कोई सानी न था। और उस लोहार की दुकान पर बने सामानों का सारे जगत में आदर था। दूर-दूर के बज़ारों में उसकी चीजें बिकती थीं, उसका नाम बिकता था। फिर रोम पर हमला हुआ और रोम में जितने प्रतिष्ठित लोग थे, पकड़ लिए गए। रोम हार गया वो लोहार भी पकड़ लिया गया वो तो काफ़ी ख्यातिलब्ध आदमी था। उसके बड़े कारखाने थे और उसके पास बड़ी धन-सम्पत्ति थी, बड़ी प्रतिष्ठा थी वो भी पकड़ लिया गया। तीस, रोम के प्रतिष्ठित, जो सर्वशक्तिशाली आदमी थे, उनको पकड़ के दुश्मनों ने ज़ंजीरों और बेड़ियों में बाँध के पहाड़ों में फेंक दिया, मरने के लिए। जो उनतीस थे, वो तो रो रहे थे, लेकिन वो लोहार शान्त था। आखिर उन उनतीसों ने पूछा कि, "तुम शान्त हो, हमें फेंका जा रहा है, जंगली जानवरों को खाने के लिए उसने कहा, "फ़िकिर मत करो, मैं हूँ, मैं लोहार हूँ। ज़िन्दगी भर मैंने बेडियाँ और हथकड़ियाँ बनाई हैं, में खोलना भी जानता हूँ। तुम घबड़ाओ ...

mahakta Aanchal story in Hindi -ढेर हुआ ताज महल -महकता आंचल स्टोरी - राजिया मेंहदी

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mahakta Aanchal story in Hindi -ढेर हुआ ताज महल -महकता आंचल स्टोरी - राजिया मेंहदी राजिया मेंहदी मैं तो पिया की थी पिया की रहूंगी मैं तो पिया पिया पिया ही कहूंगी. तानिया बड़े ऊंचे सुरों में अपनी आदत- के खिलाफ शुरू थी । "खैरियत तो है तानिया? यह आज तानसेन की रूह को कौन झिन्झोड़ रहा है।" सानिया की आवाज़ से जैसे वह अपनी ख़्वाबों की नगरी से पलट आई- “क्यों, मैं क्या कभी गुनगुना नहीं सकती ?" "ज़रूर सकती हो मेरी जान ! मगर यह चमत्कार हुआ कैसे ? इतना लहक लहक कर किसे याद किया जा रहा है ? वह कौन है बदनसीब ?" "कोई नहीं। कोई भी नहीं ।'' कहते कहते वह खिड़की से बाहर देखने लगी । सानिया से बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ। वह जैसे चोरी पकड़ लेने वाले अन्दाज़ में उठी- “वाकई तानिया ! कोई है ऐसा कोई ज़रूर है कि तुम्हारा चेहरा यूं...... ।" वह शरारत से उंगली उठाकर हंस पड़ी। तानिया खुद पर काबू पा चुकी थी _ "बकवास करने की जरूरत नहीं ।" "मगर अभी अभी कुछ कुछ होता हुआ लग रहा था ।' "क्या अभी अभी ? मैंने ज़रा सा बेवकूफ बनाया और आप बन गयी...