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गधे और धोबी की कहानी हिंदी में

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गधे और धोबी की कहानी विषयसूची  गधे और धोबी की कहानी हिंदी में  गधे और धोबी की कहानी से मिली सीख गधे और धोबी की कहानी हिंदी में एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी ख़राब था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पीने को मिल पाता था। एक दिन, धोबी को एक मेरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, "मैं इस बाघ की खाल डालूँगा और उसे पड़ोसियों के मार्गदर्शन में चरने के लिए छोड़ दूँगा।" किसान समझेंगे कि वह स्टाइल का बाघ है और उसे डरकर दूर ले जाया जाएगा और गढ़ा आराम से खेत में ले जाया जाएगा।'' धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना पर काम किया गया। एक रात गढ़ा खेत में घूम रहा था कि उसे किसी गढ़ी की रैंक की आवाज सुनाई दी। उस आवाज को सुनकर वह जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा। गोल्ड की आवाज सुनकर किसानों को उनकी असलियत का पता चला और उन्होंने गिल्ड की भरपूर सराहना की! गधे और धोबी की कहानी से मिली सीख वैसे कहा गया है कि अपनी सच्चाई छुपानी नहीं चाहिए।

गधो का सत्कार Hindi Story Hindi Kahaniyan

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गधो का सत्कार । Hindi Story। Hindi Kahaniyan बहुत समय पहले की बात है. एक जंगल में गधे ही गधे रहते थे। पूरी आजादी से रहते, भरपेट खाते-पीते और मौज करते । गधों के लिए वह जंगल स्वर्ग की तरह था। एक दिन एक लोमड़ी को  मजाक सूझा। उसने मुंह लटकाकर गधों से कहा- 'मैं चिंता से मरी जा रही हूं और तुम इस तरह आराम से घूम रहे हों हमारे यहां कितना बड़ा संकट सिर पर आ पहुंचा है!' गधों ने उत्सुकता से पूछा- 'दीदी, भला क्या हुआ, बात तो बताओ!' लोमड़ी ने कहा- 'मैं अपने कानों से सुनकर और आंखों से देखकर आई हूं, जंगल की झील की मछलियों ने एक सेना बना ली है और वे अब हम सब पर हमला करने वाली है। लोमड़ी की यह बात सुन कर सभी गधे असमंजस में पड़ गए । उन्होंने सोचा, व्यर्थ जान गंवाने से क्या लाभ, चलो कहीं अन्यत्र चलो ! सारे गधे जंगल छोड़कर गांव की ओर चल पड़े । सबके दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि इससे पहले कि मछलियां हम पर हमला करें, जितना दूर हो सके, निकल लेने में ही भलाई है । और वे सब लोमड़ी को शुक्रिया भी कह रहे थे कि अगर उसने न बताया होता तो हमारा बचना भी मुश्किल ही था। जब ये सारे गधे...

मूर्ख कौआ और चालाक लोमड़ी की कहानी | Kauwa Aur Lomdi Ki Kahani

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मूर्ख कौआ और चालाक लोमड़ी की कहानी |Kauwa Aur Lomdi Ki Kahani एक समय एक लड़का पनीर खा रहा था कि एक कौवा उड़कर कहीं से आया और लड़के के हाथ से पनीर कर टुकड़ा झपट कर तेजी से एक वृक्ष के ऊपर जा बैठा, और मजे से पनीर खाने लगा। तभी एक लोमड़ी उधर से गुजरी उसने कौवे की चोंच में पनीर के टुकड़े को देखा और लालच से अपने होठों पर जीभ को फेरा। लोमड़ी ने कांवे से कहा "कौवे भाई तुम कितने प्यारे दिखते हो, तुम्हारे चमकीले पंख और नोकीली चोंच जब इतनी सुन्दर है, तो तुम्हारी आवाज कितनी मधुर होगी ?" कौआ अपनी झूठी प्रशंसा सुन कर खुश हो गया, और जोर जोर से काँव -काँव करने लगा। ऐसा करते ही उसकी चोंच में पकड़ा हुआ पनीर का टुकड़ा नीचे गिर गया, जिसे लोमड़ी उठा कर भाग गई। चालाक लोमड़ी ने जाते जाते कहा "प्यारे कोए तुम्हारी आवाज तो बहुत अच्छी है पर बुद्धी नहीं है।" सीख:- झूठी प्रशंसा करने वालों से बचो।