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बच्चो की कविताएं | Kids Poem in Hindi l Poem in Hindi

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बच्चो की कविताएं | Kids Poem in Hindi l Poem in Hindi  इस ब्लॉग के जरिए हम Kids Poom in Hindi बच्चों के लिए सबसे मजेदार  Poem in Hindi  मे लेकर आए है। यह  poem बच्चो को बहुत पसंद आती है।    यह पर जो बच्चों की कविताए प्रस्तुत की गई। है। वह उनके शिक्षा के स्तर में काफी लाभप्रद है । बच्चे की कविताए| Kids Poem in Hindi | Poem in Hindi   पकौड़ी आई पकौड़ी। छुन छुन छुन छुन तेल में नाची,  प्लेट में आ शरमाई पकौड़ी। आई पकौड़ी। हाथ से उछली मुँह में पहुँची, पेट में जा घबराई पकौड़ी। दौड़ी-दौड़ी आई पकौड़ी। मेरे मन को भाई पकौड़ी क्यू एक और मजेदार कविता                             चल रे मटके टम्मक टू  हुए बहुत दिन बुढ़िया एक,  चलती थी लाठी को टेक। उसके पास बहुत था माल,  जाना था उसको ससुराल । मगर राह में चीते, शेर,  लेते थे राही को घेर । बुढ़िया ने सोची तदबीर,  जिससे चमक उठे तकदीर । मटका एक मँगाया मोल,  लंबा- लंबा गोल-मटोल । उसमें बैठी बुढ़िया आप...

जीवन की यात्रा-Hindi Motivational Story

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जीवन की यात्रा -Hindi Motivational Story  Hello दोस्तो आप सभी का सारा का जहां ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तों आज का यहां ब्लॉग आप सभी के लिए बहुत ही दिलचस्प और मोटिवेशनल होने वाली है। दोस्तो जीवन की यात्रा इस ब्लॉग के जरिए से मैं आपको जीवन की यात्रा क्या है एक Hindi Motivational Story के माध्यम से जानेंगे।   एक मनोरम हिंदी प्रेरक कहानी के माध्यम से जीवन की यात्रा की खोज करें। • जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और प्रेरणा प्राप्त करें। • विचारोत्तेजक और प्रेरक पढ़ने के लिए ब्लॉग पोस्ट देखें। • सारा का जहाँ ब्लॉग समुदाय में शामिल हों और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित हों। जीवन की यात्रा -Best Motivational Story On life  एक राजा ने अपने राज्य में रहने वाले लोगों के लिए एक महान राजमार्ग का निर्माण किया। लेकिन इसे जनता के लिए खोलने से पहले राजा ने एक प्रतियोगिता का फैसला किया । यह चुनौती यह देखने के लिए थी कि राजमार्ग पर सबसे अच्छा सफर कौन करता है, और विजेता को सोने का एक बॉक्स प्राप्त करना था। प्रतियोगिता के दिन सभी लोग आए। कुछ के...

गधे और धोबी की कहानी हिंदी में

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गधे और धोबी की कहानी विषयसूची  गधे और धोबी की कहानी हिंदी में  गधे और धोबी की कहानी से मिली सीख गधे और धोबी की कहानी हिंदी में एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी ख़राब था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पीने को मिल पाता था। एक दिन, धोबी को एक मेरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, "मैं इस बाघ की खाल डालूँगा और उसे पड़ोसियों के मार्गदर्शन में चरने के लिए छोड़ दूँगा।" किसान समझेंगे कि वह स्टाइल का बाघ है और उसे डरकर दूर ले जाया जाएगा और गढ़ा आराम से खेत में ले जाया जाएगा।'' धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना पर काम किया गया। एक रात गढ़ा खेत में घूम रहा था कि उसे किसी गढ़ी की रैंक की आवाज सुनाई दी। उस आवाज को सुनकर वह जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा। गोल्ड की आवाज सुनकर किसानों को उनकी असलियत का पता चला और उन्होंने गिल्ड की भरपूर सराहना की! गधे और धोबी की कहानी से मिली सीख वैसे कहा गया है कि अपनी सच्चाई छुपानी नहीं चाहिए।

गधो का सत्कार Hindi Story Hindi Kahaniyan

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गधो का सत्कार । Hindi Story। Hindi Kahaniyan बहुत समय पहले की बात है. एक जंगल में गधे ही गधे रहते थे। पूरी आजादी से रहते, भरपेट खाते-पीते और मौज करते । गधों के लिए वह जंगल स्वर्ग की तरह था। एक दिन एक लोमड़ी को  मजाक सूझा। उसने मुंह लटकाकर गधों से कहा- 'मैं चिंता से मरी जा रही हूं और तुम इस तरह आराम से घूम रहे हों हमारे यहां कितना बड़ा संकट सिर पर आ पहुंचा है!' गधों ने उत्सुकता से पूछा- 'दीदी, भला क्या हुआ, बात तो बताओ!' लोमड़ी ने कहा- 'मैं अपने कानों से सुनकर और आंखों से देखकर आई हूं, जंगल की झील की मछलियों ने एक सेना बना ली है और वे अब हम सब पर हमला करने वाली है। लोमड़ी की यह बात सुन कर सभी गधे असमंजस में पड़ गए । उन्होंने सोचा, व्यर्थ जान गंवाने से क्या लाभ, चलो कहीं अन्यत्र चलो ! सारे गधे जंगल छोड़कर गांव की ओर चल पड़े । सबके दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि इससे पहले कि मछलियां हम पर हमला करें, जितना दूर हो सके, निकल लेने में ही भलाई है । और वे सब लोमड़ी को शुक्रिया भी कह रहे थे कि अगर उसने न बताया होता तो हमारा बचना भी मुश्किल ही था। जब ये सारे गधे...

लालची कबूतर

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लालची कबूतर लालची कबूतर एक बार की बात किसी जंगल में एक बढा सा पेड़ था। उस पेड़ पर प्रतिदिन बहुत से पक्षी आकर विश्राम करते थे। एक दिन एक बहेलिये ने पक्षी पकड़ने की इच्छा से वहाँ चावल के दाने फैला दिये और उसके ऊपर जाल बिछा दिया और स्वयं एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया । कुछ समय बाद उस पेड़ पर एक कबूतरों का झुण्ड आकर विश्राम करने लगा । तभी उनकी नजर चावलों के दानो पर पड़ी । दाने देखकर उनकी भूख जाग उठी और वह दाने चुगने के लिए जाने लगे। तब उनके मुखिया ने उन्हे समझाया की उसे इन दानों के पीछे कुछ गड़बड़ लग रही है, इसलिए उन्हें यह दानें नहीं चुगने चाहिए। पर कबूतरों ने अपने मुखियाकी बात नहीं सुनीं और दाने चुगने के लिए चले गए। सारे कबूतर जाल में फँस गए। उन्हे अपने मुखिया की बात न मानने तथा लालच करने की सजा मिल गई। उनके मुखिया ने उन्हे एक दिशा में उड़ने के लिए कहा। सब कबूतर जाल के साथ एक ही दिशा में उड़े और बेहलिया देखता ही रह गया । सब कबूतर अपने मुखिया के दोस्त चूहे के घर जा पहुँचे । चूहे ने अपने पैने दांतो से जाल काट कर कबूतरों को मुक्त कर दिया। कबूतरों ने अपने प्राण बचाने वाले नन्हे च...

चरवाहा लड़का

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चरवाहा लड़का  एक चरवाहा लड़का अपने भेड़ो के झुण्ड को जंगल में चराने ले जाता था और एक बार बोर हो कर उसने सोचा क्यों न एक खेल खेलें। इसी सोच से वह जोर जोर चिल्लाने लगा "भेड़िया, भेड़िया भेड़िया भेड़ के बच्चे को ले जा रहा है। " खेतो में काम कर रहे किसान भागते भागते उसके पास आये। किसान आते ही पूछे 'किधर है भेड़िया ?" लड़के ने हसते हसते बोला "कोई भेड़िया नहीं था, मै बोर हो गया था इसलिए सोचा की आप लोगो को बुला लूँ । किसान बहुत गुस्सा हुए और उसको डांटा और फिर वह से वापस खेत में चले गए। ऐसा ही उस लड़के ने चार पांच बार और किया और हर बार किसान आते थे लेकिन हर बार वह लड़का मजाक कर रहा होता था एक बार सचमूच में भेड़िया उसके सामने आ गया और जल्द से वह लड़का पेड़ पे चढ़ के अपनी जान बचाया। हर बार की तरह इस बार भी वह लड़का भेड़िया कह कर चिल्लाया लेकिन किसानो को लगा की इस बार भी मजाक कर रहा है। और कोई भी नहीं पंहुचा। इसी बिच भेड़िया ने एक भेड के बच्चे को उठा कर लेता चला गया।  कहानी से सीख : एक झूठे का सच कभी नहीं माना जाता है।

नानक की सीख

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नानक की सीख श्री गुरुनानकजी महाराज प्रभु-नाम का प्रचार करते हुए पहुंचे बगदाद में। वहां राज करता था खलीफा । लोगों ने बताया कि खलीफा कंजूस बहुत है, किसी को एक कौड़ी भी नहीं देता। गुरुजी मुस्कुरा, कंकरों की एक पोटली बांध ली और अपने पास रख ली। सत्संग होने लगा कुछ दिनों के बाद खलीफा भी सत्संग में आया। सत्संग की समाप्ति पर गुरुजी ने खलीफा को आशीर्वाद दिया, बोले, खलीफा मैं हूं फकीर, स्थान-स्थान पर घूमता फिरता हूं। मेरे ये कंकर संभालकर अपने पास रख लें। मैं कभी मिलूंगा तो तुम से ले लूंगा । खलीफा ने कहा परन्तु ये तो कंकर हैं। गुरुजी बोले- मेरे लिए ये कंकर ही बहुमूल्य हैं। आप इन्हें संभालकर रख लें। खलीफा ने पूछा-परन्तु आप इन्हें वापस कब लेंगे? गुरुजी बोले ये तो मुझे भी मालूम नहीं। हो सकता है इस जीवन में फिर कभी आपसे भेंट ही नहीं हो सके। इस अवस्था में ये कंकर मैं आप से उस दिन ले लूंगा जबकि सब लोग खुदा के सामने अपना-अपना हिसाब देने के लिए इक्कठे होंगे। खलीफा ने कहा, परन्तु वहां मृत्यु के बाद, कयामत के दिन ये कंकर मैं साथ लेकर कैसे जाऊंगा ? गुरुजी ने मुस्कुराते हुए कहा- अपने इतने माल - ख...