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मुंशी प्रेमचन्द की कहानी ईदगाह।Hindi story

सारा का जहां हिन्दी कहानियां महकता आंचल स्टोरी इन हिन्दी Sara ka jahan , Hindi story,mehkta Aanchal Stories in Hindi मुंशी प्रेमचन्द की कहानी ईदगाह।Hindi story     हैलो मेरे प्यारे दोस्तो, आज हम मुंशी प्रेमचन्द जी की कहानी ईदगाह हिंदी मे । यह मुंशी प्रेमचन्द जी की कहानी सारा के जहां मे, महत्वपूर्ण बातो की सही और सटीक जानकारी देने की कोशिश है। हमारा हमारा एकमात्र लक्ष्य हमारे सभी दोस्तो को एक ही लेख में सारी जानकारी देना है। ताकि आप लोगो का समय बर्बाद न हो। तो चलिए आगे पढ़ते है

दो रुपये में दुआHindi Motivational Story

दो रुपये में दुआ।Hindi Motivational Story। उर्दू के मशहूर शायर अल्लामा इकबाल एक दिन अपने कमरे में बैठे थे कि नौकर ने आकर खबर दी कि कोई पीर साहब मिलने आए हैं। खबर सुनकर इकबाल उनसे मिलने अपने मुलाकाती कमरे में पहुंचे। अभी वह पीर साहब से बात करने बैठे ही थे कि बाहर से एक मुरीद घबराया सा आया और पीर के पैरों पर गिरकर , 'हुजूर, जैसे ही खबर मिली कि आप यहां हैं, मैं भागा-भागा आ ।। हुजूर, मेरी हालत बेहद खराब है । मेरे सिर पर दो सौ रुपये उधार चढ़ गया है। आप मेरे लिए दुआ करें कि यह कर्ज 'उतर जाए।' यह कह कर दो रुपये पीर को भेंट दिए। पीर साहब ने दो रुपये अपनी जेब में डाले और हाथ उठाकर अपने मुरीद के लिए दुआ मांगने लगे। यह देख इकबाल से न रहा गया। उन्होंने भी तुरंत हाथ उठाए और ऊंची आवाज में दुआ करने लगे, 'ऐ खुदा, आजकल के पीर गुमराह हो गए हैं। उन्हें अक्ल दे और आजकल के मुरीदों को सही राह दिखा कि ये पीरों के झांसों में ना आएं। या इलाही, यह मुरीद कहता है कि इस पर दो सौ रुपये का कर्ज है। मगर यह नहीं जानता कि अब इस पर दो सौ नहीं, बल्कि दो सौ दो रुपये का कर्ज है।' इस बात पर पीर साहब को ब...

जंगल की दोस्ती । हिंदी कहानियां नई।

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जंगल की दोस्ती, पंचतंत्र की कहानी जंगल की दोस्ती । हिंदी कहानियां नई। सारा का जहां। जंगल की दोस्ती  जंगल में चूहों और हाथियों की कहानी: एक मनोरम ब्लॉग पोस्ट जो जंगल में चूहों और हाथियों की कहानी के माध्यम से दोस्ती और लचीलेपन के विषय की पड़ताल करती है।जंगल की दोस्ती की एक कहानी: कैसे चूहों और हाथियों ने विपरीत परिस्थितियों पर काबू पाया जानवरों का साम्राज्य अप्रत्याशित दोस्ती और अनोखे बंधन की अविश्वसनीय कहानियों से भरा है। ऐसी ही एक कहानी है जंगल में चूहों और हाथियों के बीच की अद्भुत दोस्ती। आकार और रूप-रंग में बहुत भिन्न होने के बावजूद, इन दोनों प्राणियों ने एक अटूट बंधन बनाया है जो सभी बाधाओं को दूर करता है। दोस्ती की यह कहानी न केवल दिल छू लेने वाली है, बल्कि यह हमें प्रतिकूल परिस्थितियों पर काबू पाने और उन लोगों के साथ समान आधार खोजने के महत्व के बारे में भी सिखाती है जो हमसे अलग लग सकते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम जंगल में चूहों और हाथियों के बीच अद्भुत दोस्ती, उनके दैनिक जीवन और गतिविधियों और वे जंगल में एक साथ कैसे रहते हैं, इसका पता लगाएंगे। 1जंगल की कहानी परिचय:...

मूर्ख कछुआ

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मूर्ख कछुआ बहुत समय पहले की बात है। एक पा जो किसी गांव में एक नदी में रहता था। उस की उन बगुलो से दोस्ती थी। दोनों दोस्त एक साथ खूब मजा किया करते थे। एक बार उनके यह  बारिश नहीं हुई, जिस कारण वहां  नदी सुख गई। पशु पक्षी प्यास से मरने लगे। बगुले अपनी जान बचाने के लिये नदी छोड़ दूसरे स्थानों पर जाने लगे। बगूलों ने भी अन्य पक्षियों के साथ दूसरे जगह जाने का फैसला लिया जाने से पूर्व वह अपने मित्र कछुए से मिलने गये। उनके जाने की बात सुनकर कछुए ने उनसे उसे भी अपने साथ में ले जाने के लिए कहा इस पर बगुलों ने कहा कि यह भी उसे वहाँ छोड़ कर नहीं जाना चाहते  परन्तु   ले जा नहीं सकता और वह उड़कर कहीं भी जा सकते है। उनकी बात सुनकर बोला कि यह सच है कि वह नहीं सकता। परन्तु उसने पास इस समस्या का हल है। एकीकरों ने उतरी।। बोला तुम एक मजबूत डंडी लाओ। उस डंडी  के दोनों कोनों को तुम अपनी-अपनी चोंच मे पकड़ लेना और मैं उसी को बीच में से पकड़कर लटक जाऊंगा। इस प्रकार मैं भी तुम्हारे साथ जाऊगा और हम अपनी जान बचा सकेंगे।" बगुलों को कछुए की बात पसंद आ गई और वह वहां से चलने की ...

‌अच्छे लोग, बुरे लोग

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‌अच्छे लोग, बुरे लोग  बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक गुरुजी गंगा किनारे स्थित एक गांव में अपने शिष्यों के साथ स्नान कर रहे थे। तभी एक राहगर आया और उनसे पूछा, 'महाराज, इस गांव में कैसे लोग रहते हैं, मैं अपने मौजूदा दरअसल, मैं अपने निवास स्थान से कहीं और जाना चाहता हूं ?' गुरुजी बोले, 'जहां तुम अभी रहते हो, वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?' मत पूछिए महाराज, 'वहां तो एक से एक कपटी, दुष्ट और बुरे लोग बसे हुए हैं।' राहगीर बोला । गुरु जी बोले, 'इस गांव में भी बिलकुल उसी तरह के लोग रहते हैं, कपटी, दुष्ट, बुरे।' यह सुनकर राहगीर आगे बढ़ गया। कुछ समय बाद एक दूसरा राहगीर वहां से गुजरा। उसने भी गुरु जी से वही प्रश्न पूछा, 'मुझे किसी नयी जगह में रहना है, क्या आप बता सकते हैं कि इस गांव में कैसे लोग रहते हैं?' 'जहां तुम अभी निवास करते हो वहां किस प्रकार के लोग रहते हैं ?' गुरु जी ने इस राहगीर से भी वही प्रश्न पूछा। 'जी, वहां तो बड़े सभ्य, सुलझे और अच्छे लोग रहते हैं।' राहगीर बोला ।  'तुम्हें बिलकुल उसी प्रकार के लोग यहां भी...

बच्चो की कविताएं | Kids Poem in Hindi l Poem in Hindi

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बच्चो की कविताएं | Kids Poem in Hindi l Poem in Hindi  इस ब्लॉग के जरिए हम Kids Poom in Hindi बच्चों के लिए सबसे मजेदार  Poem in Hindi  मे लेकर आए है। यह  poem बच्चो को बहुत पसंद आती है।    यह पर जो बच्चों की कविताए प्रस्तुत की गई। है। वह उनके शिक्षा के स्तर में काफी लाभप्रद है । बच्चे की कविताए| Kids Poem in Hindi | Poem in Hindi   पकौड़ी आई पकौड़ी। छुन छुन छुन छुन तेल में नाची,  प्लेट में आ शरमाई पकौड़ी। आई पकौड़ी। हाथ से उछली मुँह में पहुँची, पेट में जा घबराई पकौड़ी। दौड़ी-दौड़ी आई पकौड़ी। मेरे मन को भाई पकौड़ी क्यू एक और मजेदार कविता                             चल रे मटके टम्मक टू  हुए बहुत दिन बुढ़िया एक,  चलती थी लाठी को टेक। उसके पास बहुत था माल,  जाना था उसको ससुराल । मगर राह में चीते, शेर,  लेते थे राही को घेर । बुढ़िया ने सोची तदबीर,  जिससे चमक उठे तकदीर । मटका एक मँगाया मोल,  लंबा- लंबा गोल-मटोल । उसमें बैठी बुढ़िया आप...

जीवन की यात्रा-Hindi Motivational Story

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जीवन की यात्रा -Hindi Motivational Story  Hello दोस्तो आप सभी का सारा का जहां ब्लॉग पर स्वागत है। दोस्तों आज का यहां ब्लॉग आप सभी के लिए बहुत ही दिलचस्प और मोटिवेशनल होने वाली है। दोस्तो जीवन की यात्रा इस ब्लॉग के जरिए से मैं आपको जीवन की यात्रा क्या है एक Hindi Motivational Story के माध्यम से जानेंगे।   एक मनोरम हिंदी प्रेरक कहानी के माध्यम से जीवन की यात्रा की खोज करें। • जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और प्रेरणा प्राप्त करें। • विचारोत्तेजक और प्रेरक पढ़ने के लिए ब्लॉग पोस्ट देखें। • सारा का जहाँ ब्लॉग समुदाय में शामिल हों और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित हों। जीवन की यात्रा -Best Motivational Story On life  एक राजा ने अपने राज्य में रहने वाले लोगों के लिए एक महान राजमार्ग का निर्माण किया। लेकिन इसे जनता के लिए खोलने से पहले राजा ने एक प्रतियोगिता का फैसला किया । यह चुनौती यह देखने के लिए थी कि राजमार्ग पर सबसे अच्छा सफर कौन करता है, और विजेता को सोने का एक बॉक्स प्राप्त करना था। प्रतियोगिता के दिन सभी लोग आए। कुछ के...

गधे और धोबी की कहानी हिंदी में

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गधे और धोबी की कहानी विषयसूची  गधे और धोबी की कहानी हिंदी में  गधे और धोबी की कहानी से मिली सीख गधे और धोबी की कहानी हिंदी में एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी ख़राब था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पीने को मिल पाता था। एक दिन, धोबी को एक मेरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, "मैं इस बाघ की खाल डालूँगा और उसे पड़ोसियों के मार्गदर्शन में चरने के लिए छोड़ दूँगा।" किसान समझेंगे कि वह स्टाइल का बाघ है और उसे डरकर दूर ले जाया जाएगा और गढ़ा आराम से खेत में ले जाया जाएगा।'' धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना पर काम किया गया। एक रात गढ़ा खेत में घूम रहा था कि उसे किसी गढ़ी की रैंक की आवाज सुनाई दी। उस आवाज को सुनकर वह जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा। गोल्ड की आवाज सुनकर किसानों को उनकी असलियत का पता चला और उन्होंने गिल्ड की भरपूर सराहना की! गधे और धोबी की कहानी से मिली सीख वैसे कहा गया है कि अपनी सच्चाई छुपानी नहीं चाहिए।

गधो का सत्कार Hindi Story Hindi Kahaniyan

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गधो का सत्कार । Hindi Story। Hindi Kahaniyan बहुत समय पहले की बात है. एक जंगल में गधे ही गधे रहते थे। पूरी आजादी से रहते, भरपेट खाते-पीते और मौज करते । गधों के लिए वह जंगल स्वर्ग की तरह था। एक दिन एक लोमड़ी को  मजाक सूझा। उसने मुंह लटकाकर गधों से कहा- 'मैं चिंता से मरी जा रही हूं और तुम इस तरह आराम से घूम रहे हों हमारे यहां कितना बड़ा संकट सिर पर आ पहुंचा है!' गधों ने उत्सुकता से पूछा- 'दीदी, भला क्या हुआ, बात तो बताओ!' लोमड़ी ने कहा- 'मैं अपने कानों से सुनकर और आंखों से देखकर आई हूं, जंगल की झील की मछलियों ने एक सेना बना ली है और वे अब हम सब पर हमला करने वाली है। लोमड़ी की यह बात सुन कर सभी गधे असमंजस में पड़ गए । उन्होंने सोचा, व्यर्थ जान गंवाने से क्या लाभ, चलो कहीं अन्यत्र चलो ! सारे गधे जंगल छोड़कर गांव की ओर चल पड़े । सबके दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि इससे पहले कि मछलियां हम पर हमला करें, जितना दूर हो सके, निकल लेने में ही भलाई है । और वे सब लोमड़ी को शुक्रिया भी कह रहे थे कि अगर उसने न बताया होता तो हमारा बचना भी मुश्किल ही था। जब ये सारे गधे...

लालची कबूतर

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लालची कबूतर लालची कबूतर एक बार की बात किसी जंगल में एक बढा सा पेड़ था। उस पेड़ पर प्रतिदिन बहुत से पक्षी आकर विश्राम करते थे। एक दिन एक बहेलिये ने पक्षी पकड़ने की इच्छा से वहाँ चावल के दाने फैला दिये और उसके ऊपर जाल बिछा दिया और स्वयं एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया । कुछ समय बाद उस पेड़ पर एक कबूतरों का झुण्ड आकर विश्राम करने लगा । तभी उनकी नजर चावलों के दानो पर पड़ी । दाने देखकर उनकी भूख जाग उठी और वह दाने चुगने के लिए जाने लगे। तब उनके मुखिया ने उन्हे समझाया की उसे इन दानों के पीछे कुछ गड़बड़ लग रही है, इसलिए उन्हें यह दानें नहीं चुगने चाहिए। पर कबूतरों ने अपने मुखियाकी बात नहीं सुनीं और दाने चुगने के लिए चले गए। सारे कबूतर जाल में फँस गए। उन्हे अपने मुखिया की बात न मानने तथा लालच करने की सजा मिल गई। उनके मुखिया ने उन्हे एक दिशा में उड़ने के लिए कहा। सब कबूतर जाल के साथ एक ही दिशा में उड़े और बेहलिया देखता ही रह गया । सब कबूतर अपने मुखिया के दोस्त चूहे के घर जा पहुँचे । चूहे ने अपने पैने दांतो से जाल काट कर कबूतरों को मुक्त कर दिया। कबूतरों ने अपने प्राण बचाने वाले नन्हे च...

चरवाहा लड़का

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चरवाहा लड़का  एक चरवाहा लड़का अपने भेड़ो के झुण्ड को जंगल में चराने ले जाता था और एक बार बोर हो कर उसने सोचा क्यों न एक खेल खेलें। इसी सोच से वह जोर जोर चिल्लाने लगा "भेड़िया, भेड़िया भेड़िया भेड़ के बच्चे को ले जा रहा है। " खेतो में काम कर रहे किसान भागते भागते उसके पास आये। किसान आते ही पूछे 'किधर है भेड़िया ?" लड़के ने हसते हसते बोला "कोई भेड़िया नहीं था, मै बोर हो गया था इसलिए सोचा की आप लोगो को बुला लूँ । किसान बहुत गुस्सा हुए और उसको डांटा और फिर वह से वापस खेत में चले गए। ऐसा ही उस लड़के ने चार पांच बार और किया और हर बार किसान आते थे लेकिन हर बार वह लड़का मजाक कर रहा होता था एक बार सचमूच में भेड़िया उसके सामने आ गया और जल्द से वह लड़का पेड़ पे चढ़ के अपनी जान बचाया। हर बार की तरह इस बार भी वह लड़का भेड़िया कह कर चिल्लाया लेकिन किसानो को लगा की इस बार भी मजाक कर रहा है। और कोई भी नहीं पंहुचा। इसी बिच भेड़िया ने एक भेड के बच्चे को उठा कर लेता चला गया।  कहानी से सीख : एक झूठे का सच कभी नहीं माना जाता है।

नानक की सीख

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नानक की सीख श्री गुरुनानकजी महाराज प्रभु-नाम का प्रचार करते हुए पहुंचे बगदाद में। वहां राज करता था खलीफा । लोगों ने बताया कि खलीफा कंजूस बहुत है, किसी को एक कौड़ी भी नहीं देता। गुरुजी मुस्कुरा, कंकरों की एक पोटली बांध ली और अपने पास रख ली। सत्संग होने लगा कुछ दिनों के बाद खलीफा भी सत्संग में आया। सत्संग की समाप्ति पर गुरुजी ने खलीफा को आशीर्वाद दिया, बोले, खलीफा मैं हूं फकीर, स्थान-स्थान पर घूमता फिरता हूं। मेरे ये कंकर संभालकर अपने पास रख लें। मैं कभी मिलूंगा तो तुम से ले लूंगा । खलीफा ने कहा परन्तु ये तो कंकर हैं। गुरुजी बोले- मेरे लिए ये कंकर ही बहुमूल्य हैं। आप इन्हें संभालकर रख लें। खलीफा ने पूछा-परन्तु आप इन्हें वापस कब लेंगे? गुरुजी बोले ये तो मुझे भी मालूम नहीं। हो सकता है इस जीवन में फिर कभी आपसे भेंट ही नहीं हो सके। इस अवस्था में ये कंकर मैं आप से उस दिन ले लूंगा जबकि सब लोग खुदा के सामने अपना-अपना हिसाब देने के लिए इक्कठे होंगे। खलीफा ने कहा, परन्तु वहां मृत्यु के बाद, कयामत के दिन ये कंकर मैं साथ लेकर कैसे जाऊंगा ? गुरुजी ने मुस्कुराते हुए कहा- अपने इतने माल - ख...

शेख चिल्ली के कारनामें

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शेख चिल्ली के कारनामें  तबीअत की खराबी बचपन की ही एक और घटना है, चिल्ली मियां एक रईस के यहां नौकर हो गये। उनका काम घोड़े की देखभाल, चारा- भूसा देना, नहलाना था। एक दिन रईस घोड़े को दवा पिला रहा था, चिल्ली ने पूछा - "घोड़े को क्या हुआ?" "बीमार है, दवा पिला रहा हूं।" रईस ने जवाब दिया। होनी कुछ ऐसी हुई कि अगले दिन घोड़ा मर गया । रईस के सामने चिल्ली पहुंचे, तो उसने पूछा - "घोड़े का क्या हाल है?" चिल्ली घोड़े को मरा हुआ देखकर आये थे। बोले - "हाल-चाल कुछ खास नहीं, वह सदा के लिए सो गया है । " बोझ हल्का हो गया बचपन की बात है - एक दिन शेखजी सर पर नमक की गठरी लादे जा रहे थे। राह में नदी पड़ती थी। अचानक उनका पांव फिसल गया तथा वे गठरी समेत पानी में गिर पड़े। पानी गहरा नहीं था, इसीलिए जल्दी बाहर निकल आये, पर उनको यह जानकर बड़ी खुशी हुई कि गठरी का बोझ कुछ हल्का हो गया था। वे बड़े आराम से घर पहुंचे। दूसरे दिन रूई का बण्डल लादकर आ रहे थे। राह में नदी देखकर उन्होंने नदी में बण्डल फेंक दिया कि जारा हल्का कर लूं। पर वे हैरान कि बण्डल उनसे उठाया न गया और ...

दास्तान-ए- शेखचिल्ली

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दास्तान-ए- शेखचिल्ली खुरपे का बुखार  एक बार माता-पिता ने शेख चिल्ली को घास खोदने के लिए जंगल में भेज दिया उन दिनों चिल्ली बारह वर्ष के थे। दोपहर तक उन्होंने एक गट्ठर घास खोद ली और गट्ठर उठाकर घर चले आए। घरवाले बड़े खुश हुए। क्योंकि पहली बार चिल्ली ने कोई काम किया था। परन्तु जब कई घंटे बीत गए तो चिल्ली को याद आया कि घास खोदने के लिए जिस खुरपे को वह ले गए थे, वह तो जंगल में ही रह गया है। अतः शेख चिल्ली जंगल की तरफ दौड़े और जाकर देखा कि तेज धूप में पड़ा पड़ा खुरपा गर्म हो गया था। चिल्ली ने चिलचिलाती धूप में पड़ा हुआ अपना गर्म तवे-सा तपता खुरपा मूठ से पकड़ा। मूठ भी गर्म हो गई थी। अब तो चिल्ली घबराए । " अरे खुरपे को तो बुखार चढ़ गया है।' मन ही मन चिल्ली चिन्तित हुए और हकीमजी के पास जाकर बोले-"हकीम साहब! हमारे खुरपे को बुखार हो गया है, जरा दवाई दीजिए न। " हकीम समझ गया कि चिल्ली शरारत कर रहा है। उसने भी वैसा ही उत्तर दिया- " अरे हां, वाकई इसे तो बुखार है। जाओ, जल्दी से इसे रस्सी से बांधकर कुएं में डुबकी लगवा दो। तब भी बुखार न उतरे तो मेरे पास लाना।" च...

शेख चिल्ली की चिट्ठी

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शेख चिल्ली की चिट्ठी बच्चो, तुमने मियाँ शेख चिल्ली का नाम सुना होगा। वहीं शेख चिल्ली जो अकल के पीछे लाठी लिए घूमते थे। उन्हीं का एक और कारनामा तुम्हें सुनाएँ । मियाँ शेख चिल्ली के भाई दूर किसी शहर में आना पड़ा। बसते थे। किसी ने शेख चिल्ली को बीमार होने की खबर दी तो उनकी खैरियत जानने के लिए शेख ने उन्हें खत लिखा । उस जमाने में डाकघर तो थे नहीं, लोग चिट्ठियाँ गाँव के नाई के जरिये भिजवाया करते थे या कोई और नौकर चिट्ठी लेकर जाता था। लेकिन उन दिनों नाई उन्हें बीमार मिला। फसल कटाई का मौसम होने से कोई नौकर या मजदूर भी खाली नहीं था अत मियाँ जी ने तय किया कि वह खुद ही चिट्ठी पहुँचाने जाएँगे। अगले दिन वह सुबह-सुबह चिट्टी लेकर घर से निकल पड़े। दोपहर तक वह अपने भाई के घर पहुँचे और उन्हें चिट्ठी पकड़ाकर लौटने लगे। उनके भाई ने हैरानी से पूछा- अरे ! चिल्ली भाई ! यह खत कैसा है ? और तुम वापिस क्यों जा रहे हो? क्या मुझसे कोई नाराजगी है? भाई ने यह कहते हुए चिल्ली को गले से लगाना चाहा। पीछे हटते हुए चिल्ली बोले- भाई जान, ऐसा है कि मैंने आपको चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी ले जाने को नाई नहीं मिला तो उ...

गधा और धोबी

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गधा और धोबी एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी कमजोर था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पीने को मिल पाता था। एक दिन, धोबी को एक मरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, “मैं गधे के ऊपर इस बाघ की खाल डाल दूँगा और उसे पड़ोसियों के खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया करूँगा। किसान समझेंगे कि वह सचमुच का बाघ है और उससे डरकर दूर रहेंगे और गधा आराम से खेत चर लिया करेगा।” धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना काम कर गई। एक रात, गधा खेत में चर रहा था कि उसे किसी गधी की रैंकने की आवाज सुनाई दी। उस आवाज को सुनकर वह इतने जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा। गधे की आवाज सुनकर किसानों को उसकी असलियत का पता लग गया और उन्होंने गधे की खूब पिटाई की! इसीलिए कहा गया है कि अपनी सचाई नहीं छिपानी चाहिए।

चालाक गीदड

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चालाक गीदड    एक जंगल में एक गुफा थी।उस गुफा में एक गीदड़ रहता था। एक दिन वहा खाने की तलाश में जंगल में गया । लेकिन उसकी गुफा में एक शेर आ कर बैठ गया।थोड़ी देर बाद जब वह वापस आया तो उसे गुफा के बाहर किसी के पैरों के निशान दिखाई दिये। उसे यह निशान किसी बड़े एवं खतरनाक जानवर के प्रतीत हुए उसे किसी खतरे का एहसास हुआ। गीदड़ बहुत चालाक और सयाना था। उसने सोचा कि गुफा में जाने से पहले देखे मामला क्या है। उसने जोर से गुफा को आवाज़ लगाई "गुफा ! ओ गुफा।" लेकिन जवाब कौन देता? गीदड़ ने फिर आवाज़ लगाई, "अरे मेरी गुफा, तू जवाब क्यों नही देती ? आज तुझे क्या हो गया ? हमेशा मेरे लौटने पर तू मेरा स्वागत करती है। आज क्या हो गया। अगर तूने जवाब न दिया तो मैं किसी दूसरी गुफा में चला जाऊंगा।" गीदड़ की बात सुनकर शेर ने सोचा कि यह गुफा तो बोलकर गीदड़ का स्वागत करती है। आज मेरे यहां होने की वजह से शायद डर गई है। अगर गीदड़ का स्वागत नहीं किया तो वह चला जाएगा। ऐसा विचार कर शेर अपनी भारी आवाज़ में जोर से बोला- आओ आओ मेरे दोस्त, तुम्हारा स्वागत है ।" शेर की आवाज़ सुनकर गीदड़ वहा...

घमंडी मोर और बुद्धिमान सारस

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घमंडी मोर और बुद्धिमान सारस एक जंगल में एक मोर रहता था। वह बहुत घमण्डी था और अपने सौन्दर्य का बखान करता रहता था। वह प्रतिदिन देश के तट पर जाता, पानी में अपना प्रतिबिंब देखती और उसकी सुंदरता की प्रशंसा करता। वह कहता जरा मेरी पूँछ देखो। मेरे पंखों के रंग देखो। वास्तव में मैं संसार के सभी पक्षियों से आवक सुन्दर हूँ। एक दिन मोर को नदी के किनारे एक सारस दिखायी दिया। सारस को देखकर वह पीछे हट गया। बगुले का अपमान करते हुए उसने कहा, तू कैसी रंगहीन चिड़िया है! तेरे पंख बहुत सादे और पीले हैं। सारस ने कहा, तुम्हारे पंख सचमुच बहुत सुन्दर हैं। मेरे पंख तुम्हारे पंखों जितने सुंदर नहीं हैं। लेकिन क्या आप अपने पंखों से ऊंची उड़ान भर सकते? नही ना जबकि मैं अपने पंखा में बहुत की उड़ान भर सकता हूँ। यह कहकर सारस ऊपर आकाश में बहुत ऊंचा उड़ गया और मोर लज्जित होकर उसकी ओर देखता रह गया।

सुन्दर घोडा

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सुन्दर घोडा एक जगह एक सुन्दर घोडा चरा करता था लेकिन उसको हमेशा डर लगा रहता था क्यूंकि उसी इलाके में एक बाघ में कभी कभार दिख जाता था। लेकिन फिर भी चारा खाने वह घोडा उस इलाके में रोज निकलता था। एक दिन उसको वही पर एक शिकारी मिला। घोड़े ने उस शिकारी से अपनी परेशानी साझा की। शिकारी ने बोला "मुझे डर नहीं लगता क्यूंकि मेरे पास बन्दूक है और इससे मै किसी भी जानवर को मार गिरा सकता हु । "यह सुन कर घोड़े ने शिकारी से पूछा की क्या शिकारी उसकी मदद कर सकता है। शिकारी ने उसको बोला "मेरे साथ रहो, तुम्हारी जान को कभी ख़तरा नहीं होगा। " घोडा मान गया और वह शिकारी उसके ऊपर बैठ कर करके उसको शहर के एक अस्तबल में चोर छोड़ दिया। घोडा सोचना लगा "मुझे जान से खतरा तो हट गया लेकिन मेरी आजादी छीन गयी।

ढोलू और मोलू

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ढोलू और मोलू   ढोलू-मोलू दो भाई थे दोनों खूब खेलते पढ़ाई करते और कभी-कभी खूब लड़ाई भी करते थे। एक दिन दोनों अपने घर के पीछे खेल रहे थे। वहां एक कमरे में दिल्ली के दो छोटे-छोटे बच्चे थे बिल्ली की मां कहीं गई हुई थी. दोनों अकेले थे उन्हें भूख लगी हुई थी इसलिए खूब रो रहे थे ढोलू-मोलू ने दोनों बिल्ली के बच्चों की आवाज सुनी और अपने दादाजी को बुला कर लाए। दादा जी ने देखा दोनों बिल्ली के बच्चे भूखे थे दादा जी ने उन दोनों दिल्ली के बच्चों को खाना खिलाया और एक एक कटोरी दूध पिलाई। अब बिल्ली की भूख शांत हो गई। वह दोनों आपस में खेलने लगे। इसे देखकर ढोलू-मोलू बोले बिल्ली बच गई दादाजी ने ढोलू-मोलू को शाबाशी दी। नैतिक शिक्षा दूसरों की भलाई करने से ख़ुशी मिलती है। Moral of this short hindi story-Always try to help others, It will give real pleasures